स्वास्थ्य

सूर्य नमस्कार से तन और मन स्वस्थ और ऊर्जामय होगा, योग एक्सपर्ट सविता यादव से सीखें योग

आज के लाइव योग सेशन (लाइव योग सत्र) में हमने छोटे-छोटे कई योगाभ्यासों को सीखा। योग स्वास्तिक को बेहतर बनाए रखते हैं। वहीं इम्युनिटी को बेहतर बनाए रखने में भी योग की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसमें सूर्य नमस्कार, डॉल्फिन पोज और शीर्ष आसान के बारे में जाना और सीखा। इन आसन के जरिए स्वास्तथक (स्वास्थ्य) ठीक रहता है और तनाव (तनाव) से भी मुक्ति मिलती है। इस लाइव योगा सेशन में कई आसनों के जरिये शरीर को लचीला बनाने और हाथों, पैरों की मजबूती के लिए भी कई योगाभ्यास की पढ़ाई की गई। योगाभ्नियाँ करते समय इस बात का ध्यान रखें कि इसे धीरे-धीरे करना चाहिए। दृष्टिकोणयम से पहले ये तीन नियम जरूर ध्यान रखें कि पेशेवर गहरा शवासन लें, गति का पालन करें और अपनी क्षमता के अनुसार योग करें …

सूर्य नमस्कार (सूर्य नमस्कार): सूर्य नमस्कार को सभी योगासनों में सबसे ज्यादा पावरफुल माना जाता है। सूर्य नमस्कार ऐसा योग है जो आपको शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखता है। पर सूर्य नमस्कार को करने का सही तरीका बहुत कम लोग जानते हैं।


प्रणाम आसन: इस आसन को करने के लिए सबसे पहले अपने दोनों पंजे जोड़कर अपने आसन मैट के किनारे पर खड़े हो जाएं। फिर दोनों हाथों को कंधे के समान उठाएं और पूरा वजन दोनों पैरों पर समान रूप से डालें। दोनों हथेलियों के पृष्ठभाग एक दूसरे से चिपकाए रहें और नमस्कार की मुद्रा में खड़े हो जाएं।हस्ततुन्नासन: इस आसन को करने के लिए गहरी सांस भरें और दोनों हाथों को ऊपर की ओर उठाएं। अब हाथ और कमर को झुकाते हुए दोनों भुजाओं और गर्दन को भी पीछे की ओर झुकाएं।

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हस्तपाद आसन: इस आसन में बाहर की ओर सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे आगे की ओर नीचे की ओर झुकें। अपने दोनों हाथों को कानों के पास से घुमाते हुए ज़मीन को छूते हैं।

अश्व संचालन आसन: इस आसन में अपनी हथेलियों को ज़मीन पर रखें, सांस लेते हुए दाएं पैर को पीछे की तरफ ले जाएं और बाएं पैर को घुटने की तरफ से मोड़ते हुए ऊपर रखें। गर्दन को ऊपर की ओर उठाएं और कुछ देर इसी तरह स्थित रहें।

पर्वत आसन: इस आसन को करने के दौरान सांस लेने के दौरान बाएं पैर को पीछे ले जाएं और पूरे शरीर को सीधी रेखा में रखें और अपने हाथ को ज़मीन पर सीधा रखें।

अष्टांग नमस्कार: इस आसन को करते हुए अपने दोनों घुटने ज़मीन पर टिकाएँ और साँस छोड़ते हैं। अपने कूल्हों को पीछे ऊपर की ओर उठाएं और अपनी छाती और ठुड्डी को ज़मीन से छुआरे और कुछ देर इसी तरह की स्थिति में रहें।

भुजंग आसन: इस आसन को करते हुए धीरे-धीरे अपनी सांस छोड़ते हुए छाती को आगे की और ले जाएं। हाथों को ज़मीन पर सीधा रखें। गर्दन पीछे की ओर झुकाएं और दोनों पंजे को सीधा रखें।

शवासन:
मैट पर बैक के फोर्स लेट जाओ और आंखें मूंद बनाएं। पैरों को आराम की मुद्रा में हल्का खुला रखें। पैर के तलवे और मुखियाँ ऊपर की ओर होनी चाहिए। हाथों को लगाकर हथेलियों को ऊपर की ओर खोलकर रखें। पैर से शरीर के हर हिस्से पर ध्यान केंद्रित करते हुए धीरे-धीरे सांस बाहर करें। धीरे धीरे इसे कम करें। जब शरीर में राहत महसूस हो तो आँखें बंद करके ही थोड़ी देर उसी मुद्रा में आराम करें।

सूर्य नमस्कार के फायदे:
सूर्य नमस्कार करने से तनाव दूर होता है, बॉडी डिटॉक्स होता है और मोटापा घटता है। जिन महिलाओं को मासिक धर्म की समस्या है उनके लिए यह काफी लाभकारी होता है। रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है।

ये लोग सूर्य नमस्कार न करें:
गर्भवती महिलाओं को सूर्य नमस्कार ना करें:
उच्च रक्ताक्ष के रोगियों को सूर्य नमस्कार ना करें।
अगर आपको पीठ का दर्द रहता है तो सूर्य नमस्कार करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें।
महिलाओं को पीरियड के दौरान सूर्य नमस्कार ना करें।




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