स्वास्थ्य

अक्सर नजरअंदाज किए जाते हैं डाइट से जुड़े ये सूचकांक, जानें क्यों

कई लोगों की दिनचर्या में खाना खाने से जुड़ी कई अतिरिक्त और खराब आदतें (खराब आदतें) होती हैं, जिन्हें ईटिंग डिसऑर्डर (भोजन विकार) यानी भोजन विकार कहते हैं। यूं तो ईटिंग डिसऑर्डर महिलाओं या पुरुषों दोनों को किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन सबसे ज्यादा यह कम उम्र की महिलाओं और विद्वानों को देखने को मिलता है। यहां ऐसे चार ईटिंग डिसऑर्डर के बारे में बताया गया है, जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं।

नोरेक्सिया नर्वोसा (वजन के प्रति गलत धारणाएं)

मायउचर के अनुसार, एनोरेक्सिया नर्वोसा एक मनोवैज्ञानिक स्थिति है, जिसमें किसी व्यक्ति का वजन उसकी लंबाई और उम्र के हिसाब से बहुत कम हो जाता है। एनोरेक्सिया से ग्रस्त लोग अक्सर अपने वजन को नियंत्रित करने के लिए ऐसी कोशिशें करते हैं, जो उनके जीवन की गतिविधियों को काफी प्रभावित कर सकते हैं। नोरेक्सिया नर्वोसा से ग्रस्त लोग बेहद कम कैलोरी वाले आहार लेते हैं क्योंकि उन्हें वजन बढ़ने का डर होता है। नोरेक्सिया का सही कारण अभी तक ज्ञात नहीं है लेकिन माना जाता है कि कई अन्य रोगों की तरह, जैविक, मनोवैज्ञानिक और पर्यावरणीय कारकों के संयोजन के साथ। ऐसा हो सकता है।

बुलिमिया नर्वोसा (बहुत ज्यादा खाना)

बुलिमिया नर्वोसा एक गंभीर और जानलेवा ईटिंग डिसऑर्डर है। इस तर्क से पीड़ित लोग बहुत अधिक खाना खा लेते हैं और उसके बाद मोटापे के डर से जबरन व्यायाम करने लगते हैं। यह एनोरेक्सिया नर्वोसा के बिल्कुल विपरीत है, क्योंकि बुलिमिया नर्वोसा से पीड़ित लोग हमेशा भोजन करते पाए जाते हैं। इस विकार के लक्षणों में उलझावड, प्रोसेड और जंक फूड का अत्यधिक सेवन करना, शरीर का आकार असामान्य होना, लगातार आइना देखना, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं जैसे गैस, कब्ज आदि शामिल हैं। यह केवल विकार नहीं है, एक मानसिक स्थिति भी है जिसमें व्यक्ति अपने बारे में नकारात्मक सोचते हैं। हालांकि सही समय पर इलाज शुरू करने से व्यक्ति बेहतर महसूस करता है और आने वाली गंभीर समस्याओं से बच सकता है।

बिंज ईटिंग डिसऑर्डर (भूख न होने पर भी खाना)

बिंज ईटिंग डिसऑर्डर से ग्रस्त लोग रोजाना अत्यधिक खाना खाते हैं और खाने पर कंट्रोल नहीं कर पाते हैं। इस सीमा में भूके ना होने के बावजूद भी लोगों को ज्यादा खाने की जरूरत है। ऐसे लोग अक्सर तब तक खाते रहते हैं, जब तक कि उन्हें पेट भरने के बाद बेचैनी ना महसूस हो।

ऑर्थोरेक्सिया (स्वस्थ खाने का जुनून)

खाने का यह नियम उन लोगों के लिए है जो स्वस्थ आहार के बारे में बेहद सरल रहते हैं। यह एक जुनून बन जाता है। स्वस्थ खाने का यह जुनून अपराधबोध की भावना को बढ़ा सकता है। इस सीमा से पीड़ित लोग अपने आहार को कम कर लेते हैं और केवल विशेष खाद्य पदार्थों को ही चुनते हैं। उनके अन्य लक्षणों में हानिकारक या जंक फूड बिल्कुल नहीं खाना, आहार में सलाद का सेवन करना इत्यादि शामिल है।

myUpchar के अनुसार, व्यक्ति को हमेशा संतुलित आहार लेना चाहिए और तब खाना चाहिए, जब भूख लगी हो। यह भी सुनिश्चित करने की जरूरत है कि जब भूख महसूस हो तो भूख को ना दबाएं।अधिक जानकारी के लिए हमारा कलात्मक, भूख न लगना पढ़ें। न्यूज 18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखित जाते हैं। स्वास्थ्य से संबंधित खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्रोत है। myUpchar में शोधकर्ता और चिकित्सक, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़े सभी बदलाव आते हैं।




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