स्वास्थ्य

जानें बच्चों में फेफड़े के विकास को कैसे रोका जा रहा है

धुंआ और प्रदूषित हवा के संपर्क में आने की वजह से एलर्जी से जुड़ी संवेदनशीलता, अस्थमा और सांस से जुड़ी कई दूसरी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

गाड़ियों और उद्योगों से निकलने वाली प्रदूषित हवा (प्रदूषित वायु) में नाइट्रोजन डाईऑक्साइड, सल्फर डाईऑक्साइड और डीजल के कण जैसे बेहद खतरनाक रसायनल होते हैं जिनसे सांस के जरिए शरीर के अंदर लिया जाए तो कई तरह की बीमारियां और नुकसान होने का खतरा हो जाता है। ।

  • आखरी अपडेट:4 नवंबर, 2020, 11:29 AM IST

राजधानी दिल्ली (दिल्ली) और उसके आसपास के शहरों की हवा की गुणवत्ता (वायु गुणवत्ता) पिछले कई दिनों से लगातार बेहद खराब स्थिति में है। अभी तक सर्दियों की सिर्फ शुरुआत है, ऐसे में वायु प्रदूषण (वायु प्रदूषण) की स्थिति तो कुछ दिनों के अंदर और बदतर हो जाएगी। मार्च 2020 में आईक्वएयर की तरफ से सामने आयी वर्ल्ड एयर क्वॉलिटी रिपोर्ट की मानें तो दुनिया के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में से 6 शहर भारत के ही हैं। वायु प्रदूषण भारत (भारत) की एक बहुत बड़ी समस्या है और अनुसंधानकर्ताओं की मानें तो भारत में हर साल 10 लाख से ज्यादा लोगों की मौत सिर्फ प्रदूषण के कारण हो जाती है।

गाड़ियों और उद्योगों से निकलने वाली प्रदूषित हवा में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और डीजल के कण जैसे बेहद खतरनाक रसायनल होते हैं, जिन्हें सांस के जरिए शरीर के अंदर लिया जाए तो कई तरह की बीमारियां और नुकसान होने का खतरा बढ़ जाता है। सामान्य लोगों की बात करें तो तो प्रदूषण के इन कणों की वजह से आंख, नाक और वायुमार्ग में तेज जलन और खुजली महसूस होने लगती है। लेकिन जिन लोगों को पहले से एलर्जी की समस्या है उनके लिए तो वायु प्रदूषण और बहुत खतरनाक साबित हो सकता है।

वायु प्रदूषण और ALLएलर्जिक रेस्पिरेटरी डिजीज यानी एलर्जी से संबंधित सांस की बीमारी जिसमें एलर्जिक राइनोकंजक्टिवाइटिस और अस्थमा शामिल है, सबसे आम बीमारियों में से एक है, जिसका मरीज के जीवन स्तर पर बुरा प्रभाव पड़ता है। सभी से संबंधित सांस की बीमारी के लिए जिम्मेदार मुख्य कारकों में वायु प्रदूषण सबसे महत्वपूर्ण है। ऐसा देखने में आया है कि वायु प्रदूषण के कारण बच्चों और सोवियत में फेफड़ों के विकास में बाधा की समस्या भी हो जाती है।

धुंआ और प्रदूषित हवा के संपर्क में आने की वजह से एलर्जी से जुड़ी संवेदनशीलता, अस्थमा और सांस से जुड़ी कई दूसरी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसका कारण ये है कि धुएं के संपर्क में आने के बाद हमारे शरीर में आईजीई (एलर्जी) के उत्पादन की क्षमता बढ़ जाती है, जो खुद को सभी को पैदा करने वाले तत्वों (पराग कण, धूल मिट्टी और प्रदूषित हवा में मौजूद प्रदूषक तत्व जैसे … हानिकारक रसायन और गाड़ियों से निकलने वाले डीजल एग्जॉस्ट आदि) से जोड़ लेते हैं। यह आईजीआई विनियमन, एलर्जिक रिऐक्शन को ट्रिगर करने का काम करता है।

पोल के कारण होने के सभी लक्षण
जिन लोगों को वायु प्रदूषण के कारण सभी की समस्या महसूस हो रही है उनमें निम्नलिखित लक्षण नजर आ सकते हैं:

  • गले में खुजली होना
  • नाक बहना
  • छियांक आना
  • पानी से आया
  • त्वचा में जगह-जगह खुजली होना

प्रदूषित हवा में मौजूद बारीक कणों (पार्टिक्यूलेट मैटर पीएम) का सेहत पर बेहद नकारात्मक असर पड़ता है लेकिन यह अस्थमा और एलर्जी से पीड़ित लोगों के लिए खासतौर पर नुकसानदेह है। अध्ययनों से पता चलता है कि हवा में पीएम कणों के बढ़ने के कारण अस्थमा से पीड़ित लोगों को अस्पताल में भर्ती करवाने की नौबत भी आ सकती है।

प्रदूषण से संबंधित सभी को सुझाव देना
घर के बाहर मौजूद वायु प्रदूषण को दूर करने या कम करने के लिए आप अपने स्तर पर बहुत ज्यादा कुछ नहीं कर सकते, लिहाजा उससे बचना ही सबसे महत्वपूर्ण तरीका है। इसके लिए आप इन उपायों को आजमा सकते हैं:

  • जब भी घर से बाहर निकलें तो विशेष रूप से भीड़भाड़ और ट्रैफिक वाले इलाके में तो कामकाज जरूर पहनें। ऐसी करने से प्रदूषित हवा में मौजूद शुद्धि खिचड़ी शरीर के अंदर प्रवेश नहीं कर रही है जिससे आपकी एलर्जी और अस्थमा के लक्षणों को बढ़ने से रोकने में मदद मिलेगी।
  • बहुत ज्यादा धुएं वाले कमरे या स्मोक जोन में जाने से परहेज करें।
  • अगर आपको सभी की समस्या है और आप फिर से भी करते हैं तो आपको अपनी इस आदत को बदल देना चाहिए।
  • आप जिन इलाके में रहते हैं वहां की रोजाना की एयर क्वॉलिटी इंडेक्स पर नजर रखें और जब हवा में प्रदूषण का स्तर बहुत अधिक हो तो घर से बाहर निकलने से परहेज करें खासकर वे लोग जिन्हें अस्थमा और एलर्जी की समस्या है। साथ ही घर के बाहर किसी भी तरह की ऐक्ट सेल भी करने से लेकर।
  • अगर आप किसी मेन रोड या भीड़भाड़ वाले इलाके में रहते हैं जहां पर का का लेवल बहुत अधिक है तो घर की खिड़कियां बंद ही रखें ताकि प्रदूषण के कण अंदर न आ पाएं। आप चाहते हैं तो एसी का इस्तेमाल कर कमरे के अंदर की हवा को साफ कर सकते हैं।
  • जिन लोगों को एलर्जी की समस्या होती है वे गंध को लेकर बहुत ज्यादा संवेदनशील होते हैं इसलिए खुद भी बहुत तेज खुशबू वाले पर्फ्यूम का इस्तेमाल न करें औ इस्तेमाल होमवालों से भी ऐसा करने के लिए कहें।
  • घर के अंदर इंडोर पलूशन न हो और अंदर की हवा साफ रहे इसके लिए आप चाहें तो एयर प्योरिफायर का इस्तेमाल कर सकते हैं जिसमें हेपा एयर फिल्टर लगा हो।अधिक जानकारी के लिए हमारा कलात्मक ALL का लक्षण, कारण, इलाज । वहां में न्यूज 18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखित जाते हैं। स्वास्थ्य से संबंधित खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्रोत है। myUpchar में शोधकर्ता और चिकित्सक, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़े सभी बदलाव आते हैं।

टीकाकरण: इस लेख में दी गयी जानकारी कुछ विशेष स्वास्थ्य स्थितियों और उनके संभावित उपचार के संबंध में शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी योग्य और लाइसेंस प्राप्त चिकित्सक द्वारा दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवा, जांच, निदान और इलाज का विकल्प नहीं है। यदि आप, आपका बच्चा या कोई करीबी ऐसी किसी स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रहा है, जिसके बारे में यहाँ बताया गया है तो जल्द ही जल्द ही डॉक्टर से संपर्क करें। यहां पर दी गयी जानकारी का उपयोग किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या बीमारी के निदान या उपचार के लिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के ना करें। यदि आप ऐसा करते हैं तो ऐसी स्थिति में आपको होने वाले किसी भी तरह से संभावित नुकसान के लिए ना तो myUpchar और ना ही न्यूज़पेपर जिम्मेदार होगा।




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