स्वास्थ्य

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए जरूर करें ये योगासन, अंदर के रोगाणु खत्म कर देंगे

योग (योग) शरीर को स्वस्थ रखने के लिए बहुत आवश्यक है। खासकर इस कोरोना (कोरोना) काल में योग करने से कई तरह की बीमारियों से छुटकारा पाया जा सकता है। योग न सिर्फ लोगों को शारीरिक रूप से स्वस्थ रखता है बल्कि मानसिक रूप में हेल्दी रखने में भी मदद करता है। योग से आप अपने पेट की चर्बी को कम कर सकते हैं, अपने रीढ़ की हड्डी को मजबूत बना सकते हैं और कमर (कमर) को लचीला भी बनाए रख सकते हैं। योग करने से आपके शरीर ने केवल बाहर से सुंदर दिखता है बल्कि शरीर के अंदर से भी हेल्दी रहता है। बैठकर काम करने से पेट की चर्बी भी तेजी से बढ़ती है। ऐसे में आपको कुछ विशेष योगासनों का अभ्यास करना चाहिए। योग करने से शरीर स्वस्थ रहता है और जीवन संयमित बना रहता है। निम्नलिखित योगासनों की मदद से स्वस्थ रहने की कोशिश करें।

बाहरी अग्निसार आसन
बाह्य अग्निसार क्रिया प्राणायाम का एक प्रकार है। अग्निसार क्रिया से शरीर के अंदर अग्नि उत्पन होता है, जो कि शरीर के अंदर के रोगाणु को भस्म कर देता है। इसे प्लाविनी क्रिया भी कहते हैं।

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इस प्राणायाम का अभ्यास खड़े होने के साथ, बैठकर या लेटे तीनों तरह से किया जा सकता है। बैठकर की जाने वाले अभ्यास में इसे सिद्धासन में बैठकर दोनों हाथ से दोनों घुटनों पर रखकर किया जा सकता है। इस क्रिया को करने के लिए शरीर को स्थिर कर पेट और फेंफड़े की वायु को बाहर छोड़ते हुए उड्डियन बंध पाते हैं अर्थात पेट को अंदर की ओर खींचना होता है। सहजता से जितनी देर से रोकना चाहिए रोकना चाहिए और पेट को नाभि पर से बार-बार झटके से अंदर खींचना और ढीला छोड़ना चाहिए।

बाह्य अग्निसार आसन के फायदे
यह क्रिया दोष प्रक्रिया को गति देने में उसे मजबूत बनाता है। शरीर के सभी तरह के रोगाणुओं को भस्म कर शरीर को स्वस्थ करता है। यह क्रिया पेट की चर्बी गकर मोटापे को दूर करती है और यह कब्ज में भी लाभदायक है।

बटरफ्लाई आसन
बटरफ्लाई आसन बहुत ही एफेक्टेड है। इसे डीवीडी आसन भी कहते हैं। महिलाओं के लिए ये आसन विशेष रूप से लाभकारी है। बटरफ्लाई आसन करने के लिए पैरों को सामने की ओर फैलाते हुए बैठ जाएं ,ाइन की हड्डी सीधी रखें। घुटनो को मोड़ना और दोनों पैरों को श्रोणि की ओर लाएं। दोनों हाथों से अपने अपने पांव को कस कर पकड़ लें। सहारे के लिए अपने हाथों को पांव के नीचे रख सकते हैं। एड़ी को जननांगों के रूप में लगभग हो सके लाने का प्रयास करें। लंबी, गहरी सांस लें, सांस छोड़ते हुए घटनों और जांघो को जमीन की तरफ झुकाना डालें। क्रिस्टल के पंखों की तरह दोनों पैरों से ऊपर नीचे हिलाना शुरू करें। धीरे धीरे तेज करें। सांस लें और सांस छोड़ें। शुरुआत में इसे जितना संभव हो सके उतना ही करें। धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ा।

बटरफ्लाई आसन के फायदे
जांघो, और घोनो का अच्छा खिंचाव होने से कूल्हों में यह परिवर्तन होता है। मासिक धर्म के दौरान होने वाली असुविधा और मोनोपॉज के लक्षणों से आराम। गर्भावस्था के दौरान लगातार प्रसव से आसानी से।

भू-नमन आसन
आसन में सबसे पहले जमीन पर बैठ जाओ। अपनी क्षमता के अनुसार अपने पैर फैलाता है। इस दौरान ध्‍यान रखें कि आपका पंजे बिल्कुल सीधा रहें। इसके बाद सांस लेने के बाद हाथ ऊपर की ओर ले जाएं। अब अपने दोनों हाथों को पैरों की ओर लाते हुए पैरों की अंगुलियों को पकड़ें। इसके बाद अपनी ठोड़ी को जमीन से लगाने का प्रयास करें।

भू-नमन आसन के फायदे
भू नमन आसन को नियमित रूप से करने से डाइजेशन बेहतर होता है। इसके अलावा इससे पैरों की धमनी भी मजबूत होती हैं।

पद्मासन
पद्मासन शब्द दो अलग शब्दों से मिलकर बना है। पद्मासन में पहला शब्द पद्म है, जिसका अर्थ कमल होता है जबकि दूसरा शब्द आसन है, जिसका अर्थ बैठना होता है। पद्मासन में योगी ऐसी स्थिति में बैठता है जैसे कमल का फूल।

पद्मासन करने के फायदे
पद्मासन करने से शरीर को बहुत जबरदस्त फायदे मिलते हैं। अगर आप कभी अशांत और बेचैन महसूस कर रहे हैं तो पद्मासन का अभ्यास करें। ये आपके मन को शांत करने में मदद करेंगे। ये कमर और हृदय रोग के लिए बेहतरीन आसन है। ये मेडिटेशन के लिए बताए गए बेहतरीन आसनों में से एक है।

वज्रासन
बहुत हेवी डाइट के बाद तुरंत सोने या बैठकर टीवी देखने से डाइजेशन संबंधी समस्याएं हो जाती हैं। ऐसे में अगर आप रोज खाने के बाद टीवी देखने या तुरंत सोने के बजाय वज्रसन को अपने रूटीन में शामिल करेंगे तो यकीनन आप डाइजेशन से संबंधित समस्याओं से दूर रहें। वज्रसन को आप दिन में कभी भी कर सकते हैं लेकिन यह अकेला ऐसा आसन है जो खाने के तुरंत बाद बहुत अधिक प्रभावी होता है। यह न सिर्फ परिष्करण की प्रक्रिया ठीक रखता है बल्कि लोअर बैकेन से भी आराम दिलाता है।

वज्रसन करने का तरीका
इस आसन को करने के लिए घुटनों को मोड़कर पंजों के बलवान बैठें। दोनों पैरों के शिशु आपस में मिलना चाहिए और एल्स में थोड़ी दूरी होनी चाहिए। शरीर का सारा भार पैरों पर रखें और दोनों हाथों को जांघों पर रखें। आपकी कमर से ऊपर का हिस्सा बिल्कुल सीधा होना चाहिए। थोड़ी देर इस अवस्था में बैठकर लंबी सांस लें। जिन लोगों को जोड़ों में दर्द हो या गठिया की समस्या हो वे इस आसन को न करें।

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वज्रसन के फायदे
वज्रसन के दौरान शरीर के मध्य भाग पर सबसे अधिक दबाव पड़ता है। इस दौरान पेट और आंतों पर हल्का दबाव पड़ता है जिससे कांस्टिपेशन की समस्या दूर होती है और पाचन ठीक रहता है। वज्रसन की मुद्रा में कमर और पैरों की मांसपेशियों का तनाव दूर होता है और झाड़ियों खुलते हैं। अधिक चलने या देर तक खड़े होने के बाद इस आसन की मदद से आराम महसूस होगा।




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