स्वास्थ्य

सर्दी में वृद्धि हो सकती है कोरोनावायरस का खतरा ज्यादा, स्मॉग और प्रदूषण है

कोरोनावायरस (कोरोनावायरस) पर रोज नए-नए अध्ययन (स्टडी) और शोध (रिसर्च) हो रहे हैं जिनमें अलग-अलग तर्क और जोखिमों को पेश किया जा रहा है। वायरस के मद्देनजर एक शोध के मुताबिक, जिन देशो में कोरोनावायरस (कोविद 19) का प्रकोप ज्यादा है वहां वायु प्रदूषण (वायु प्रदूषण) इसके सामान्य लक्षण (डेनोमिनेटर) की भूमिका निभाई जा सकती है। यह अध्ययन इसी वर्ष मार्च में किया गया था। शोधकर्ताओं ने चेताया है कि सर्दियों में न केवल वायरस तेजी से फैलेगा बल्कि वायु प्रदूषण और स्मॉग (स्मॉग) का खतरा भी बढ़ जाएगा। राजधानी दिल्ली और इसके आस-पास के क्षेत्रों में इसका खतरा अधिक बताया जा रहा है।

को -19 और वायु प्रदूषण के संबंध में
अभी तक के अध्ययनों में बताया गया है कि कोविड -19 से व्यक्ति की श्वसन प्रणाली पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। लेकिन समय के साथ यह पाया गया है कि वायरस व्यक्ति के लिए पूरे शरीर के लिए हानिकारक बन गया है जो शरीर में मौजूद लगभग सभी महत्वपूर्ण भागों का नुकसान हो रहा है। कोरोनावायरस पर हुए पूर्व अध्ययनों में यह तर्क सही साबित हुआ तो इस वायरस का वायु प्रदूषण से सीधा संबंध हो सकता है क्योंकि दोनों ही अवस्थाओं में फेफड़े को नुकसान पहुंचता है।

वैज्ञानिक भी करते हैं इसका समर्थन

हारवर्ड के टी.एच. चैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के वैज्ञानिक भी वायु प्रदूषण को कोरोना का सामान्यरण मानते हैं। उनके अध्ययन के मुताबिक, हवा में मौजूद कंक्रीट से यह सबूत मिला कि वायु प्रदूषण को विभाजित -19 की मृत्युदर में बड़ी कमी ला सकती है। इससे पहले वैज्ञानिकों का मानना ​​था कि अत्यधिक प्रदूषित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को इस घातक बीमारी से मरने का खतरा काफी अधिक था।
वैश्विक तौर पर अमेरिका में कोरोना की स्थिति बहुत भयावह है और जंगलों की आग से निकलने वाला धुंआ इस स्थिति में और भी चिंता बढ़ा देता है। वायु प्रदूषण और कोरोना के बीच संबंधों पर अमेरिका के रोग नियंत्रण और हस्तक्षेप केंद्र (सीडीसी) ने अपनी वेबसाइट पर दिशानिर्देश जारी किए हैं और उन स्थानों को सूचीबद्ध किया है जहां इन दोनों का एक अधिक है।

कैसे सुरक्षित रहें
सर्दियों के मौसम में वायु प्रदूषण, स्मॉग और कोरोना लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। लेकिन इन उपायों को अपनाकर आप इन तीनों विनातों से अपना बचाव कर सकते हैं।

– घर में ही रहें, जरूरी काम से ही बाहर निकलें।

– बाहर जाने के लिए समय-निर्धारण लगाना न और।

– उच्च जोखिम वाले व्यक्ति, विशेष रूप से श्वसन समस्याओं वाले लोग घर पर ही रहते हैं।

– सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें।

– बाहर वर्कआउट और श्रिंग करने से, घर पर योगा करें।

– फेफड़े को मजबूत करने के लिए सांस संबंधी व्यायाम करें।

– हेल्दी डाइट का सेवन करें, विशेषकर फेफड़ों को स्वस्थ रखने वाला भोजन करें।

– आस-पास के कूदे को न जला।

आस-पास जाने के लिए वाहन का उपयोग न करें।




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