दिल्लीराज्य

सड़कों से किसानों को हटाने के लिए आज सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाईआंदोलन का समर्थन करने के लिए आगे आयी UP की खापें

कृषि कानूनों के विरोध में आज किसानों के आंदोलन का 21 वां दिन

कृषि कानूनों के विरोध में आज किसानों के आंदोलन का 21 वां दिन। दिल्ली की सीमाओं से हटाने के लिए किसानों को आज सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई होगी। लॉ के छात्र ऋषभ शर्मा ने इस आवेदन को लागू किया था। वे कहते हैं कि किसानों के आंदोलन के कारण, लोग रोड जाम से परेशान हो रहे हैं। प्रदर्शन स्थानों पर सोशल डिस्टेंसिंग न होने के कारण कोरोना का जोखिम भी बढ़ रहा है। किसानों की भूख हड़ताल, कृषि मंत्री कहते हैं – जवाब की प्रतीक्षा कर रहे हैं, 6 राज्यों के 10 संगठन कानूनों के समर्थन में हैं

किसान आंदोलन को लेकर कि UP खाप पंचायतों का समर्थन
कई खाप पंचायतों ने उत्तर प्रदेश केमुजफ्फरनगर में आंदोलन का समर्थन किया है। 17 दिसंबर को दिल्ली के प्रदर्शन में शामिल होगी ये खापें।अखिल खाप परिषद के सचिव, सुभाष बालियान ने यह जानकारी दी। यहां, किसान संगठनों ने कहा है कि वे दिल्ली और नोएडा के बीच चिल्ला बॉर्डर को पूरी तरह से अवरुद्ध करेंगे।

मोदी ने कहा – सरकार किसानों के हर संदेह को दूर करेगी
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को गुजरात दौरे के दौरान कहा कि विपक्ष किसानों को गुमराह करने की साजिश कर रहा है। वे डर रहे हैं कि उनकी जमीन पर दूसरे कब्जा कर लेंगे। यदि कोई डेयरी वाला दूध लेने का कॉन्ट्रैक्ट करता है तो क्या वह पशु को भी ले जाता है ? उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार हर संदेह को हल करने के लिए तैयार है। मोदी ने गुजरात में सिख संगठनों से भी मुलाकात की।

राजनीति: इस मुद्दे को किसान बनाम किसान बनाया जा रहा है। जो किसान आंदोलन कर रहे हैं, उन्हें इंतजार करा कर थकाने और उनके सामने कानून का समर्थन करने वालों की बड़ी फौज तैयार करने की योजना बनाया बनाई जा रही है। देशभर के सांसदों-विधायकों की ड्यूटी लगाई गई है कि उन किसानों की लिस्ट तैयार करें जो समर्थन देने को तैयार हैं। पिछले 5 दिन में 16 संगठनों का समर्थन जुटा भी लिया है। AIKCC के किसान नेता वीएम सिंह और भाकियू भानु को अपने पक्ष में ले आए हैं। संयुक्त मोर्चे के सामने चुनौती खड़ी हो गई है कि कैसे सभी को एकजुट रखा जाये।

शुरुआत में हर राज्य से किसान और संगठन आंदोलन को समर्थन देने पहुंच रहे थे। पिछले एक हफ्ते में सरकार ने माहौल को बदलने पर जोर दिया है। फील्ड में केंद्रीय मंत्रियों से लेकर सांसदों, विधायकों को उतारा है। मंत्री लगातार मीडिया के सामने आकर पक्ष रख रहे हैं तो सांसद और विधायक फील्ड में जाकर किसानों को समझा रहे हैं। वहीं सोशल मीडिया पर भी बड़ा अभियान शुरू किया है, जिसमें उन सभी प्रवक्ताओं और नेताओं की ड्यूटी लगाई है जो सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं। कृषि कानूनों के फायदे वाले और माहौल बदलने के लिए सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट किएजा रहे हैं।

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