स्वास्थ्य

उम्र के साथ-साथ पीरियड साइकिल में आते हैं ये परिवर्तन, जानें

20, 30 और 40 की आयु में मासिक धर्म में क्या आते हैं परिवर्तन जानें

अवधि गाइड: 20, 30 और 40 वर्ष की आयु में मासिक धर्म (मासिक धर्म) में परिवर्तन के कारण महिलाओं को पेट में दर्द, व्यवहार में परिवर्तन और मितली जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ जाता है …

  • News18Hindi
  • आखरी अपडेट:2 नवंबर, 2020, 6:31 AM IST

तस्य प्रारंभ होने पर मासिक धर्म (माहवारी) भी शुरू हो जाता है। पीरियड्स के चार फेज होते हैं। इस दौरान शरीर के निचले हिस्से से रक्त का स्राव होता है। इन दिनों महिलाओं को पेट में दर्द, व्यवहार में बदलाव और मितली जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ जाता है। महिलाओं के शारीरिक स्वास्थ्य और बच्चेदानी के लिहाज से माहवारी लाभदायक भी मानी जाती है। यदि मासिक धर्म चक्र समय पर ना हो तो यह बड़ी चिंता का कारण भी बन सकता है। बात करेंगे 20, 30 और 40 साल की आयु में मासिक धर्म (माहवारी) में किस तरह के बदलाव महसूस होते हैं।

20 की आयु में पीरियड्स
लड़कियों को इस उम्र में इन दिनों रक्त का स्राव नियमित रूप से होता है। नियमित पीरियड्स आने के दौरान कई समस्याआओं का सामना करना पड़ सकता है। इस दौरान गर्भनिरोधक का सेवन रक्त प्रवाह को कम या ना के बराबर कर सकता है। हालांकि यह कोई अधिक चिंता का विषय नहीं है। यदि पीरियड्स चक्र के तीन महीने तक ऐसा होता है तो आपको डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

उम्र के इस पड़ाव पर आप तनावरहित हैं और गर्भवती भी नहीं है और आपको एक सप्ताह तक पीरियड्स रहते हैं तो इसका कारण कोई हॉर्मोनल संतुलन (पीसीओएस) हो सकता है। इस कारण अंडाशय में सिस्ट विकसित होने लगते हैं। 20 वर्ष की आयु में इस तरह की समस्या आम है। इसके विपरीत इस उम्र में तनाव, ब्रेकअप, रिलेशनशिप आदि से पीरियड्स चक्र संक्रमण होते हैं। क्योंकि इस अवस्था में तनावग्रस्त हॉर्मन्स अंडाशय में संदेश नहीं दे पाते हैं और पीरियड्स अनियमित रूप से आते हैं। इस उम्र में पीएमएस के लक्षण सामने आते हैं जिसमें स्तनों का सख्त होना, पेट में दर्द और अन्य माहवारी पूर्व लक्षण शामिल होते हैं।30 की उम्र में पीरियड्स

उम्र के इस पड़ाव पर महिलाओं में पीरियड्स नियमित रूप से होते हैं जिनमें महिलाव अधिक और कम भी हो सकता है। इस उम्र में एंडोमेट्रियोसिस (एंडोमेट्रियोसिस) और फाइब्रॉएड (फाइब्रॉएड) भी सामान्य रूप से देखा जाता है। इस उम्र में माँ बनना आपके माहवारी चक्र को सामान्य रूप से बदल देता है। स्तनपान कराने से भी इस पर प्रभाव पड़ता है। इस दौरान महिलाओं को सौम्य गर्भाश्य में वृद्धता, ध्रुव और फाइब्रॉएड की समस्याएं घेर लेती हैं। शारीरिक रूप से कम लेकिन मासिक धर्म चक्र पर इसका प्रभाव अधिक पड़ता है।

40 की उम्र में पीरियड्स
इस समय रजोनिवृत्ति से पहले का होता है। उम्र के इस पड़ाव में महिलाओं को पीरियड्स नियमित रूप से न होना आना या बिल्कुल भी नहीं होना जैसी समस्याओं से जूझती हैं। 40 की उम्र के आस-पास मां बनना भी महिलाओं के लिए आसान नहीं होता है। शरीर को इस उम्र पर सहज होने में समय लगता है। व्यायाम के रुटीन में परिवर्तन भी मासिक चक्र पर असर छोड़ते हैं। इस उम्र में व्यायाम करने से गर्भाशय का खतरा अधिक रहता है, जो अनियमित पीरियड्स का पहला लक्षण है।

इस दौरान समस्या होने पर डॉ की सलाह काम आ सकती है। कुछ महिलाओं को रजोनिद्रा से दस साल पहले ही पेरीमोनोपॉज की समस्या उत्पन्न हो सकती है। यहाँ तक कि यदि आपका डिम्बोत्सर्जन (ओव्यूलेशन) अनियमित नहीं है तो भी आप गर्भवती हो सकती हैं। यदि आप एक वर्ष तक पीरियड्स नहीं हुए तो आप रजोनिवृत्ति चरण में पहुंच चुके हैं। इस स्तर पर ऐसा होता है कि कंट्रोलस्टोन और एस्ट्रोजन स्वायत रूप से कार्यशील नहीं हो पाते हैं। ये किशोरावस्था में जैसे काम करते हैं, इस पड़ाव पर ये वैसे काम नहीं कर पाते हैं।




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