स्वास्थ्य

क्या दो दशकों से कम होने लगा है स्वस्थ इंसानों के शरीर का औसत तापमान

लगभग दो सौ साल पहले जर्मन (जर्मन) फिजिशियन कार्ल वुंड्रिच ने बताया था कि मानव के शरीर (मानव शरीर) का औसत तापमान (औसत तापमान) 98.6 डिग्री फेहरनहाइट है। तब से अब तक डॉ (डॉक्टर) से लेकर बच्चों के माता -पिता तक इससे मानक मानते हुए बीमार लोगों का बुखार (बुखार) नापते आ रहे हैं कि वह कितना तीव्र है। लेकिन हाल के कुछ वर्षों में स्वदेश व्यानों में शरीर का औसत तापमान कम हो गया है।

दो साल के दो अध्ययन
वर्ष 2017 में यूके में हुए एक अध्ययन में 35 हजार व्यक्तियों के शरीर का औसत तापमान कम पाया गया है जो कि 97.9 डिग्री फेहरनहाइट पाया गया है। वहीं साल 2019 में किए गए एक अन्य अध्ययन में अमेरिका के पालो आल्टो और कैलीफोर्निया के लोगों में शरीर का औसत तापमान 97.5 डिग्री फेहरनहाइट पाया गया।

नवीनतम शोधहाल ही में यूसी सांता बारबरा के मनवोलोजी के प्रोफेसर माइकल गूर्वन की अगुआई में आंतरिक फिजिशियन, मानवविज्ञानियों और स्थानीय शोधकर्ताओं की एक टीम ने इस तरह की तापमान में कमी बोलिविया के अमेजन के स्थानीय जनसंख्या / साइने लोगों में पाया है।

16 साल से लोगों का अध्ययन

साइने हेल्थ एंड लाइफ हिस्टरी प्रोजेक्ट के सह निदेशक गूर्वन और उनके साथी शोधकर्ता 16 साल से इस जनसंख्या का अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने यहां औसत शारीरिक तापमान में तेजी से गिरावट देखी है। यह तापमान 0.09 डिग्री फेहरनहाइट प्रतिवर्ष की दर से कम हो रहा है। इस तरह से आज साइने लोगों में औसत शारीरिक तापमान 97.7 डिग्री फेहरनहाइट है।

लंबे समय के बाद इंसान (इंसान) के शरीर (शरीर) का औसत तापमान (औसत तापमान) में कमी होती देखी गई है। (प्रतीकात्मक चित्र: पिक्साबे)

दो दशकों से कमी
गूर्वन का कहना है, ‘पिछले दो दशकों से हम एक ही दर की कमी देख रहे हैं जैसे कि अमेरिका में दो सौ साल देखे गए थे। ” गूर्वन की टीम के विश्लेषण में 18 हजार नमूने लिए गए थे। जिसमें 5,500 वास्क थे। इस अध्ययन में आसपास के तापमान और शरीर के वजन जैसे कारकों को भी शामिल किया गया था जो शरीर के तापमान को सीधा प्रभावित कर सकते थे।

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दो सौ साल पुराना अध्ययन में
यह मानव विज्ञानीय शोध साइन्स एडवेंट्स जर्नल प्रकाशित हुआ है। गूर्वन ने बताया कि दो सौ साल पहले अमेरिका मे हुए गृह युद्ध के दौरान वहां औसत शारीरिक तापमान में कमी पर हुआ अध्ययन एक ही जनसंख्या पर हुआ था और उसे यह पता नहीं चल रहा था कि यह कमी क्यों हुई थी।

क्या पता चलता है
इस पर बात करते हुए गूर्वन ने बताया, “यह साफ था कि इंसान की शारिरिक क्रिया विज्ञान बदल सकती है। एक प्रमुख मत यह है कि हमें कम संक्रमण हुआ, बेहतर हाइजीन हुआ, साफ पानी, वैक्सीन और इलाज मिला। हमारे अध्ययन में हम इस विचारों को सीधा सुझाव दे सकते थे। हमारे पास हर मरीज को देखे जाने के समय के क्लिकल निदान और संक्रमण आदि के बायोमार्कर की जानकारी है।

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शोधकर्ताओं ने पिछले सौ वर्षों में मानव (मानव) के बेहतर स्वास्थ्य (स्वास्थ्य) को इसकी वजह होने की पड़ताल भी की .. (प्रतीकात्मक चित्र: पिक्साबे)

सबसे महत्वपूर्ण सवाल और संभावनाएं
इस मामले में महत्वपूर्ण सवाल यही था कि अमेरिकी और साइने लोगों के लिए शरीर का तापमान कम क्यों हुआ। इस पर शोधकर्ताओं ने पहले की तुलना में बेहतर स्वास्थ्य को कारण के रूप में विचार किया, लेकिन उनका मानना ​​है कि यह अकेले ही इसका कारण नहीं हो सकता है। इसके अलावा शोधकर्ताओं ने संक्रमण और बीमारियों से कम जूज़ेन, आधुनिक दवाओं का उपयोग, लोगो में श्रम करने की आदत का कम होना, अपने शरीर को तापमान विविधताओं से बचा कर रखना, जैसे कारकों पर भी विचार किया, लेकिन कोई भी इसमें निर्णायक और एकमात्र है। कारण नजर नहीं आया।

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शोधकर्ताओं का कहना है कि दुनिया में कोई भी सार्वभौमिक सामान्य शारीरिक तापमान नहीं होता है। हर इंसान का दिन भर तक में तापमान एक डिग्री कम रहता है। फिर भी यह इस अध्ययन के नतीजे के दूसरे बड़े लोगों पर होने वाले शोधों के लिए उपयोगी हो सकते हैं।




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