स्वास्थ्य

दूसरी बार कोरोना क्षमताओं में वैज्ञानिक बोले, हर्ड इम्यूनिटी से महामारी को हराने की उम्मीद बेकार है

सेंडेकटिक फोटो

कोरोना हेरड इम्युनिटी: वैज्ञानिक ने बताया कि उन्हें दूसरी बार कोरोनाबर्ट होने के बाद पता चला कि बीमारी के बाद तीसरे महीने के अंत में एंटी बॉडीज का पता नहीं चल रहा था।

  • News18Hindi
  • आखरी अपडेट:30 अक्टूबर, 2020, सुबह 8:04 AM IST

नई दिल्ली। वैश्विक महामारी कोरोनावायरस (कोरोनावायरस) से पीड़ित रोगियों का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। कोरोनावायरस पर प्रयोग कर रहे एक वैज्ञानिक ने खुद को दूसरी बार इससे बेहतर कर लिया है। खुद को दूसरी बार कोविड -19 (Covid-19) से अस्थिर करने वाले वैज्ञानिक का कहना है कि उन्होंने इम्यूनिटी (प्रतिरक्षा) को ज्यादा बेहतर तरीकों से समझने के लिए ऐसा किया। 69 वर्षीय डॉ। अलेक्जेंडर शिपरनो ने कहा, कोविड -19 से बनने वाली एंटी बॉडीज के रवैये, दृढ़ता और शरीर में मौजूद रहने के समय का प्रभावयना किया। वैज्ञानिकों ने पाया कि एंटी बॉडीज तेजी से कम हो गया है।

वैज्ञानिक ने बताया कि उन्हें दूसरी बार कोरोना रोग होने के बाद पता चला कि बीमारी के बाद तीसरे महीने के अंत में एंटी बॉडीज का पता चला जा रहा है। उन्होंने बताया, मेरे शरीर की एंटी बॉडीज पहली बार बीमार होने के ठीक 6 महीने बाद गिर गई और कोवड -19 से सुरक्षा देनेवाली एंटी बॉडीज छह महीने बाद खत्म हो गई जबकि दूसरी बार संदिग्ध होने पर अस्पताल में भर्ती होना पड़ा।

हर्ड इम्यूनिटी की उम्मीद बेकार है

बता दें कि वो पहली बार फ्रांस की यात्रा पर फरवरी में कोरोनावायरस से चेतन हुए थे। पहली बार कोरोना से ठीक होने के बाद उन्होंने इंस्टीट्यूट ऑफ क्लीनिकल एंड एक्सपेरीमेंटल मेडिसीन में कोरोनावायरस एंटी बॉडीज पर अध्ययन शुरू किया। इस दौरान उन्होंने लक्षण के तौर पर गले में खराश का अनुभव किया। उनका दूसरा संक्रमण पहले से ज्यादा गंभीर था। उन्होंने कहा, ‘5 दिन तक मेरा तापमान 39 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा है और मेरी सूंघने की क्षमता खत्म हो गई है। इसके साथ ही स्वाद का अनुभव बदल गया.बिहारी के छठे दिन फेफड़े की कठोर स्कैन साफ ​​था और स्कैन के तीन दिन बाद एक्सरे से दोहरे न्यूमनिया का पता चला। वायरस तेजी से चला गया और दो हफ्ते बाद अन्य सैंपल से पकड़ में नहीं आया। अध्ययन के बाद डॉ ने नतीजा निकाला कि हर्ड इम्यूनिटी से महामारी को हराने की उम्मीद बेकार है।

हर्ड इम्यूनिटी के लिए जारी की चेतावनी

शिपरनो ने कहा कि हमें वैक्सीन की जरूरत होगी, जिसका इस्तेमाल कई बार किया जा सकता है। उन्होंने कहा, एक बार एडेनोवायरल वेक्टर आधारित वैक्सीन से लगाए जाने पर हम उसे लेने के योग्य नहीं होंगे क्योंकि एडेनोवायरल इंजेक्शन बार-बार हस्तक्षेप करेगा। खुद के मामले पर आधारित डॉ के निष्कर्ष से खुलासा हुआ कि हर्ड इम्यूनिटी को पा लेना नामुमकिन नहीं तो मुश्किल जरूर है क्योंकि वायरस आने वाले कई सालों तक रहेगा।

शिपरनो ने हर्ड इम्यूनिटी के खिलाफ चेतावनी जारी करते हुए कहा है को विभाजित -19 को खत्म करने के लिए वैक्सीन के कई डोज का इस्तेमाल करना होगा।




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