स्वास्थ्य

सोरायसिस क्या है, स्किन विशेषज्ञ से जानें

सोरायसिस त्वचा से संबंधित, क्रॉनिक और ऑटोइम्यून बीमारी है। यह देखता है कि यह बीमारी बहुत जटिल है- और हकीकत यह है कि बीमारी काफी फैली हुई है और अक्सर यह बीमारी या तो डायग्नोज ही नहीं हो पाती या फिर गलत तरीके से डायग्नोज होती है- इसके बारे में जागरूकता फैलाना महत्वपूर्ण है। इसी को देखते हुए हर साल 29 अक्टूबर को विश्व सोरायसिस डे मनाया जाता है। यही वह समय है जब वैश्विक स्तर पर इस बीमारी से लड़ने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए, इस वर्ष विश्व सोरायसिस डे का थीम है- “इन्फॉर्म्ड यानी अवगत रहना”।

हमने, गुरुग्राम स्थित आर्टिमिस हॉस्पिटल में डर्मेटोलॉजी एंडिस्मेटोलॉजी विभाग की प्रमुख, डॉ मोनिका बैम्ब्रू से बात की और उन्हें यह जानने की कोशिश की आखिर सोरायसिस बीमारी के बारे में अधिक चर्चा करने की जरूरत क्यों है, खासकर स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के मद्देनजर।

सोरायसिस सिर्फ स्किन की बाहरी सतह तक ही सीमित नहीं है
सोरायसिस में आमतौर पर त्वचा पर पपड़ीदार घड़ी बन जाती हैं जो बहुत तेजी से बढ़ते हैं और फिर जल्दी ही उतर भी जाते हैं, बावजूद इसके सोरायसिस कोई साधारण स्किन डिजीज नहीं है। डॉ बैम्ब्रू कहती हैं, “आम लोगों को लगता है कि त्वचा रोग की प्रकृति या तो फंगल होता है या फिर बैक्टीरियल लेकिन सोरायसिस के साथ ऐसा नहीं है। सोरायसिस एक सिस्टेमिक यानी दैहिक बीमारी है और इसलिए इसे ऑटोइम्यून बीमारी के रूप में वर्गीकृत किया गया है। है। शरीर के इम्यून सिस्टम का काम शरीर को सुरक्षित रखना है। लेकिन कभी-कभी, इम्यून सिस्टम गलती से शरीर पर ही करने करने लगता है। सोरायसिस के मामले में, इम्यून सिस्टम शरीर के सबसे बड़े अंगों में से एक स्किन पर ही हमला होता है। करने का लगता है- जिसकी वजह से आंतरिक सूजन और बाकी लक्षण नजर आते हैं। “डॉ बैम्ब्रू आगे कहती हैं,” आमतौर पर त्वचा रोग केवल त्वचा को प्रभावित करते हैं लेकिन अगर आपको सोरायसिस है, तो सूजन आपके शरीर के आंतरिक अंगों में भी हो सकती है। सकता है, विशेष रूप से हृदय से संबंधित कार्डियोवस्कुलर सिस्टम में। सोरायसिस की वजह से मेटबॉलिक सिंड्रोम भी हो सकता है जिसमें संबंधित रोगों की एक पूरी श्रृंखला शामिल है। “

डायहॉन्डस, गलत डायहॉल्ड्स और डायहॉल्ड्स डेल

चूंकि सोरायसिस के लक्षण त्वचा रोग से संबंधित अन्य बीमारियों से मिलते जुलते होते हैं, इसलिए जब तक आप किसी विशेषज्ञ के पास नहीं जाते तब तक बीमारी आसानी से डायग्नोज नहीं हो पाती। डॉ बैम्बू कहती हैं, “अगर कोई व्यक्ति को सोरायसिस है तो लेखकों डायग्नोसिस और उचित उपचार आवश्यक है। हम अक्सर यह देखते हैं कि अगर सोरायसिस के रोगी अपनी बीमारी की पहचान करने या उसे नियंत्रित करने में असमर्थ रहते हैं, तो लंबे समय तक उन्हें। मोटापा, डायबिटिज और हृदय रोग होने का भी खतरा बढ़ जाता है। “

डॉ बैम्ब्रू बताती हैं, “बीमारी से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण पहलू सोरायटिक गठिया है। हालांकि पहले से यह मुश्किल है कि आखिरकार किस रोगी में सोरियाटिक गठिया होगा, लेकिन इसे होने से रोकने के लिए सभी सोरायसिस रोगियों को अपनी बेहतर देखभाल करनी चाहिए। ज्यादातर, रोगी हमारे पास 8-9 साल के बाद आते हैं और तब तक उनमें जोड़ों में दर्द, इन्फ्लेमेशन, हाथ-पैर के छोटे जोड़ों में सूजन और उंगली के जोड़ों में विकृति जैसे लक्षण विकसित हो जाते हैं। ये सोरायसिस के गंभीर प्रभाव हैं। जिनकी रोकथाम की जरूरत है। “

सोरायसिस का एक और एक प्रभाव मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित है। डॉ बैम्ब्रू कहती हैं, “आमतौर पर रोगी अवसादग्रस्त हो जाते हैं, उनमें डिप्रेशन के लक्षण होते हैं और उन्हें ऐसा महसूस होता है कि समाज उन्हें स्वीकार नहीं करेगा। इसका कारण यह है कि चूंकि लोग सामाजिक होने को आकर्षक होने से जोड़कर देखते हैं। सोरायसिस बीमारी व्यक्ति की आकर्षकता को नुकसान पहुंचाती है इसलिए रोगी अक्सर स्वस्थ और स्वस्थ महसूस करने लगता है। ये कारक अन्य लोगों की तुलना में सोरायसिस के मरीज में मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों को विकसित करने के जोखिम को बढ़ाता है। सोरायसिस के साथ सबसे बड़ी समस्या है। यह है कि यह व्यक्ति के आत्मविश्वास को बहुत प्रभावित करता है। “

सोरायसिस कोटिलिटी से लेना जरूरी है
डॉ बैम्ब्रू टिप्पणियाँ करते हुए कहती हैं, “सोरायसिस को डायग्नोज करने में बहुत अधिक प्रयास या जांच की ज़रूरत नहीं होती है, लेकिन लोग त्वचा की बीमारियों को हल्के में लेते हैं।
ज्यादातर लोग इसे केवल एक छोटी फुंसी या चकत्ता मान लेते हैं और सोचते हैं कि इसका उनका सेहत पर विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा। कई लोग अपने परिवार के मेडिकल इतिहास से भी अनजान होते हैं और चूंकि जेनेटिक्स भी सोरायसिस होने में भूमिका दिखाता है, इसलिए भी इसे डायग्नोज करने में देरी होती है या फिर बीमारी गलत डायग्नोज हो जाती है। “

“बाद में सोरायसिस की वजह से कौन-कौन सी बीमारियां हो सकती हैं इसका अनुमान लगाना मुश्किल है, इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि आप इस बीमारी को गंभीरता से लें। उदाहरण के लिए, यदि किसी युवा मरीज को सोरायसिस हो जाता है और वह इसकी है। अनदेखा कर देता है तो इसका न सिर्फ व्यक्ति के जीवन पर प्रभाव पड़ता है बल्कि व्यकि अक्षम भी हो सकता है। यही कारण है कि सोरायसिस के मामले में विपक्षी और सही उपचार महत्वपूर्ण है। “

बीमारी के फ्लेयर-अप (भड़कने) को कैसे रोका जाता है
डॉ बैम्ब्रू बताती हैं कि भले ही आप सोरायसिस के जेनेटिक कारणों को नियंत्रित न कर पाएं लेकिन पर्यावरण से जुड़े उन कारकों का प्रबंधन कर सकते हैं जो बीमारी को बढ़ाने का काम करते हैं। धूम्रपान और शराब का सेवन बीमारी को अधिक भुड़कता है और मोटापा और वजन प्रबंधन की कमी भी। इन कारकों का ध्यान रखना और सर्दियों के मौसम में अपनी त्वचा की देखभाल करने से सोरायसिस रोगियों को बीमारी के बेहतर प्रबंधन में मदद मिल सकती है। तनाव भी सोरायसिस को बढ़ाता है और हमने विशेष रूप से को विभाजित -19 महामारी के दौरान ऐसे कई मामले देखे हैं। लिहाजा खुद को तनाव मुक्त रखें, योग और मेडिटेशन करें और डेली रूटीन को असफल बनाएं।

हालांकि सोरायसिस को पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता है और यह लंबे समय तक रहने वाली क्रॉनिक बीमारी है, लेकिन अब कॉर्टिकोस्टेरोलॉइड, विटामिन डीtyann क्रीम, इम्यूनोसप्रेसेन्ट्स आदि उपचार के विकल्प मौजूद हैं। हालांकि, यह महत्वपूर्ण है कि डॉक्टर मरीजों के साथ इलाज के इन विकल्पों पर चर्चा करें और इलाज को पेशेंट के हिसाब से कस्टमाइज़ करें ताकि वे इलाज के कोर्स को अपना कर सकें। फोल-अप के लिए डॉ के पास जाना भी आवश्यक है क्योंकि सभी दवाइयां सोरायसिस के लिए लंबे समय तक प्रभावी नहीं होती हैं। साथ ही, दवाओं के प्रभाव भी हो सकते हैं, इसलिए नियमित रूप से चेकअप के लिए डॉ के पास वापस जाना आवश्यक है।

डॉ बैम्ब्रू कहती हैं, “सोरायसिस के इलाज में जो सबसे बड़ी समस्या मैंने देखी है वह ये है कि बीमारी का सबसे अच्छा उपचार बहुत ख़राब है और इंश्योरेंस द्वारा कवर भी नहीं किया जाता है। मुझे लगता है कि बीमा योजनाओं और रीइम्बर्समेंट जैसी चीजों में सोरायसिस को भी शामिल करना बहुत महत्वपूर्ण है। “सोरायसिस कोई कैंसर बीमारी नहीं है, जो पिंपल्स की तरह अपने आप गायब हो जाएगी। इस बीमारी का जीवन पर एक बड़ा प्रभाव होता है और यह। रोगी के डर्मेटोलॉजिकल लाइफ क्वॉलिटी इंडेक्स को प्रभावित करता है।)अधिक जानकारी के लिए हमारा कलात्मक सोरायसिस के घरेलू उपाय के बारे में पढ़ें।) (न्यूज 18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखित जाते हैं। स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्रोत है। myUpchar में शोधकर्ता और चिकित्सक, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़े सभी परिवर्तनों के बारे में आते हैं।)

टीकाकरण: इस लेख में दी गयी जानकारी कुछ विशेष स्वास्थ्य स्थितियों और उनके संभावित उपचार के संबंध में शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी योग्य और लाइसेंस प्राप्त चिकित्सक द्वारा दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवा, जांच, निदान और इलाज का विकल्प नहीं है। यदि आप, आपका बच्चा या कोई करीबी ऐसी किसी स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रहा है, जिसके बारे में यहाँ बताया गया है तो जल्द ही जल्द ही डॉक्टर से संपर्क करें। यहां पर दी गयी जानकारी का उपयोग किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या बीमारी के निदान या उपचार के लिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के ना करें। यदि आप ऐसा करते हैं तो ऐसी स्थिति में आपको होने वाले किसी भी तरह से संभावित नुकसान के लिए ना तो myUpchar और ना ही न्यूज़पेपर जिम्मेदार होगा।




Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button